Period Ke Kitne Din Baad Pregnancy Nahi Hoti Hai-पीरियड के कितने दिन बाद प्रेग्नेंसी नहीं होती है

Period Ke Kitne Din Baad Pregnancy Nahi Hoti Hai

Period Ke Kitne Din Baad Pregnancy Nahi Hoti Hai

स्वागत है आपको हमारे इस लेख में क्या आप गर्भ धारण करते हैं या अनियामित गर्भस्थिति के चिंता में हैं? गर्भ धारण के आपके अवसर जानने के लिए आपके मासिक धर्म और ओव्यूलेशन के बारे में समझना बहुत जरूरी है।

सबसे अधिक पूछने वाला सवाल है, “period ke kitne din baad pregnant nahi hoti hai ” इस लेख में हम मासिक धर्म चक्र, ओव्यूलेशन और गर्भस्थ पर प्रभाव डालने वाले सभी के बारे में डिटेल्स से जानने वाले है

मासिक धर्म चक्र को समझना जरुरी

आपको बता दे की महावरी का चक्र महिला प्रसार तंत्र में माहिना भर के हार्मोनल उत्पदान का एक तरीका है। इस में ओवरी से अंडे का निकलता होता है, गर्भशय की लाइनिंग मोती हो जाति है और अगर फर्टिलाइजेशन नहीं होती है तो गर्भशय की लाइनिंग क्षीण हो जाती है।

दोस्तों आम तौर पर महिनावारी का चक्र 28 दिन का होता है, लेकिन ये 21 से लेकर 35 दिन तक भी हो सकता है।

यह जाने मासिक धर्म चक्र के चरण

  • महिनावारी का चक्र: आपको जानना जरुरी है की ये महिनावारी के चक्र का पहला चरण होता है, जिसका शुरूवात आपके पीरियड के पहले दिन से होता है और 3 से 7 दिन तक चलता है।
  • कूपिक चरण: और ये चरण आपके पीरियड के पहले दिन से ओव्यूलेशन तक का होता है। इस चरण में ओवरी में फॉलिकल्स का विकास होता है, जो अंडों को कंटेन करता है।
  • ओवुलेटरी फेज: ये चरण ओव्यूलेशन के समय होता है, जिस्मे ओवरी से पके अंडे का प्रसाद होता है। आम तौर पर ये महावरी के चक्र के 14वे दिन के आस पास होता है, लेकिन इसके अवधी परिवर्तन के अनुसर ये अलग हो सकता है।
  • लुटियल फेज: ये चरण ओव्यूलेशन के बाद शुरू होता है और अगले महावरी के शुरू तक चलता है। इस चरण में कॉर्पस ल्यूटियम का निर्माण होता है, जो प्रोजेस्टेरोन उत्पादन कर्ता है और गर्भशय को एक संभव गर्भ धारण के लिए तैयार करता है।

गर्भावस्था में अल्ट्रासाउंड कब करना चाहिए ?

गर्भावस्था कब होती है?

दोस्तों यह जानना सभी के लिए जरुरी है की गर्भ धारण केवल तभी हो सकता है जब एक स्पर्म और को फर्टिलाइज करता है। ये ओवुलेटरी फेज के दौरन हो सकता है, जिस्मे अंड को ओवरी से प्रसाद होता है और फैलोपियन ट्यूब के माध्यम से चलता है।

स्पर्म महिला के प्रसार तंत्र में पांच दिन तक जिंदा रह सकता है, इसका मतलब है कि ओव्यूलेशन से पहले होने वाला संभोग भी गर्भ धारण का कारण बन सकता है।

पीरियड आने के कितने दिन बाद प्रेग्नेंट हो सकते हैं?

दोस्तों कई लोगो का सवाल होता है की period ke kitne din baad pregnant hoti hai तो आपको बता दे की पीरियड्स खत्म होने के 10 वें दिन से लेकर 17 वें दिन तक प्रेग्नेंसी होने के 99 % होते है।

प्रेग्नेंट होने का चांस कब होता है?

दोस्तों आपको बता दे की ज्यादातर महिलाओं का मासिक धर्म चक्र 28 से 32 दिनों के बीच रह सकता है। और वही ओवुलेशन 10वें और 19वें दिन के बीच होता है। यानि की अगर मासिक धर्म के 14वें दिन और 17 वें दिन तक प्रेग्नेंसी होने के 99 % होते है।

गर्भाधान को प्रभावित करने वाले कारक क्या है ?

आयु, हार्मोन का संतुलन और कुछ अन्य मेडिकल समस्या जैसे कि गर्भ धारण में रुकावत का कारण बन सकती है। आइये जानते है डिटेल्स में

गर्भावस्था के दौरान बच्चा किस तरफ होता है-

उम्र

जैसे की आपको पता ही होगा की युग बढ़ने से साथ ही संतान प्राप्ति की शमता भी कम होने लगती है, और 35 साल के बाद गर्भ धारण करना और भी मुश्किल हो जाती है। जब महिलायें उमर बढ़ती है, तो अंडे की सांख्य और गुणवत्ता कम होने लगती हैं, जिसे ओव्यूलेशन और फर्टिलाइजेशन प्रभावित हो सकता है।

हार्मोनल असंतुलन

थायराइड की समस्या और पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) जैसे हार्मोनल अनावश्यक ओव्यूलेशन प्रभावित कर सकती है, जिसे गर्भ धारण करना मुश्किल हो सकता है।

अंतर्निहित चिकित्सा शर्तें

एंडोमेट्रियोसिस और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज (पीआईडी) जैसे कुछ मेडिकल अवस्थाएं गर्भशाय के प्रावधान तंत्र को प्रभावित कर सकती है और गर्भ धारण करना मुश्किल हो सकता है।

गर्भावस्था का पहला सप्ताह

गर्भावस्था के पहले हफ्ते में, आप अभी गर्भवती नहीं है। इस हफ्ते का हिसाब आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन से किया जाता है। इस्लीये की गर्भ धारण की सही तारीख का पता लगाना मुश्किल होता है, इस्लीये डॉक्टर और गर्भस्थ कल्कुलेटर आपके आखिरी मासिक धर्म के पहले दिन से हिसाब करते हैं।

इस समय में आपका शरीर ओव्यूलेशन के लिए तैयार होता है और अंडों को छोड़ने की तैयारी करता है, जिसे आपके संतान होने की शक्ति के दोरां जब आप संभोग करते हैं तो शुक्रानु से मिलाकर गर्भ धारण हो सकता है। यादी गर्भ धारण हो जाता है, तो उर्वरित अंडे का गर्भशय की पोषक तत्व से भरे भाग में लग जाना होता है। लेकिन यह आम तौर पर गर्भस्थिति के 3 या 4 हफ्ते में होता है।

इस समय में अपना ध्यान रखें और अगर आप गर्भ धारण करने की कोशिश कर रहे हैं तो स्वस्थ आहार लें, हाइड्रेटेड रहें, शराब और स्मोकिंग से बचें। याद आपको लगता है कि आप गर्भवती हो सकती हैं, तो आप आखिरी मासिक धर्म के कुछ दिन पहले गर्भस्थ परीक्षा करवा सकते हैं।

प्रेगनेंसी में कहाँ कहाँ दर्द होता है

गर्भस्थ के दौरन, महिलाए अपने शरीर के अंदर बच्चे को बढ़ाने के लिए होने वाले परिवर्तनो के कारण कई तरह के दर्द और तकलीफों का सामना करती है। कुछ सामान्य जगह जहाँ महिलाये दर्द का अनुभव करती है, इसमें शामिल है:

  • पीठ के नीचे वाला हिस्सा: गर्भवती महिलाओ के पीठ का मध्य बिंदु बढ़ता है, जिसके पीठ के नीचे वाला हिस्सा और दर्द का शिकार हो सकता है।
  • पीड़ित प्रदेश: बच्चों को जन्म देने के लिए पेल्विस के लिगामेंट और जोड़ कमजोर होते हैं, जिससे कुछ महिलाये काष्टदाता प्रदेश में दर्द या दबाव का अनुभव करते हैं।
  • पेट के भाग: गर्भवती महिलाओ में गर्भवाय की वृद्धि के कारण पेट के भाग में खींचव या दर्द का अनुभव हो सकता है।
  • जोड़ी और पाएं: गर्भस्थिति के तीसरे ट्राइमेस्टर में महिलाओं में जोड़ी और पाई में सुजान आना आम बात है।
  • सर में दर्द: गर्भस्थ के दौरन हॉर्मोन और खून का प्रभाव के कारण कुछ महिलाओं में सर में दर्द भी हो सकता है।
  • गर्भवती महिलाओ को किसी भी प्रकार के दर्द के लिए तकलीफ के लिए अपने स्वस्थ देखभाल वाले से बात करना जरूरी है, तकी किसी भी गंभीर समस्या का पता लगाकार उसका सही इलाज किया जा सके।

प्रेगनेंसी में पेट के निचले हिस्से में दर्द क्यों होता है?

आपको बतादे की प्रेग्नेंसी के दौरान अंडाशय में गांठ हो सकती है और इसकी वजह से यूटेरस पर दबाव पड़ता है और पैल्विक पेन होता है।

निष्कर्ष

तो अभी हम सब कुछ सीख चुके हैं कि गर्भावस्था कैसे होती है और इस प्रक्रिया में कौन कौन से फैक्टर्स मैटर करते हैं। मेंस्ट्रुअल साइकल, ओव्यूलेशन विंडो और मेडिकल कंडीशन आपके चांस ऑफ प्रेग्नेंसी में अहम रोल प्ले करते हैं। अगर ओव्यूलेशन के टाइम से पहले इंटरकोर्स होता है, तो प्रेग्नेंसी हो सकती है, लेकिन चांस कम होते हैं। गर्भावस्था के लिए, मासिक धर्म चक्र को ट्रैक करना और ओव्यूलेशन विंडो समझना बहुत जरूरी है। अगर आप प्रेग्नेंट नहीं हो पा रहे हैं तो हेल्थकेयर प्रोवाइडर से मिलना जरूरी है। उनसे आपको आगे मूल्यांकन और उपचार के विकल्प के बारे में जानकरी मिलेगी।

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